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Islamic Shayari In Hindi

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Islamic Shayari In Hindi is a beautiful expression of faith, love, and inner peace that touches the soul and connects the heart with Allah. These heart touching lines carry the sweetness of dua, the strength of patience, and words so meaningful that they bring a gentle smile and calmness to the heart.

For those searching for best lines filled with love, faith, and spiritual peace, Islamic Shayari In Hindi offers deep emotions and timeless wisdom. Every line reflects devotion, hope, and the power of prayer, reminding us that true peace lies in trusting Allah. In today’s fast-paced world, Islamic Shayari In Hindi serves as a source of comfort, spreading positivity, strengthening faith, and filling hearts with love, patience, and spiritual light.

Islamic Shayari In Hindi

Islamic Shayari In Hindi

सर हो सजदे में दिल में दग़ाबाज़ी हो
ऐसे सजदे से भला कैसे ख़ुदा राज़ी हो

डूबते-डूबते जब ख़ुदा की तरफ़ ध्यान गया
लेकर साहिल की तरफ़ ख़ुद मुझे तूफ़ान गया

इज़्ज़त करना तरबियत है, कमज़ोरी नहीं
माफ़ी माँगना हुस्न-ए-अख़लाक़ है, ज़िल्लत नहीं

अल्लाह का हर निर्णय किसी न किसी रूप में हमारे हित में ही होता है,
इसलिए शिकायत नहीं, आभार चुनना चाहिए।”

जिनका भरोसा अल्लाह हो
उनकी मंज़िल कामयाबी है

अल्लाह पर यक़ीन सख़्त अंधेरे में भी
रोशनी पैदा कर देता है

ख़ामोश रहो, सिर्फ़ ख़ुदा ही है
जो तुम्हारे दिल का बोझ उतार देगा

बेहतर सुबह वही होती है
जो अल्लाह के ज़िक्र से शुरू की जाए

ज़ुबान का कहा दुनिया सुनती है
और दिल का कहा अल्लाह सुनता है

अख़लाक़ का अच्छा होना
ख़ुदा से मोहब्बत की दलील है

दुआएँ रद्द नहीं होतीं
सिर्फ़ बेहतरीन वक़्त पर क़ुबूल होती हैं

दिन की पहली फ़तह
फ़ज्र की नमाज़ पढ़ना है

जिस दिल में दीन ज़िंदा हो
वो दिल कभी मायूस नहीं होता

लोगों से हसद करना छोड़ दें
इज़्ज़तें अल्लाह देता है, इंसान नहीं

हालात कैसे भी हों
मेरा अल्लाह रास्ते निकाल ही देता है

ख़ुदा अगर दे तो कोई छीन नहीं सकता
अगर वो छीन ले तो कोई दे नहीं सकता

Emotional Islamic Shayari In Hindi

Emotional Islamic Shayari In Hindi

अल्लाह के फ़ैसले बेहतरीन होते हैं,
जो उस पर यक़ीन करे, वही मुतमइन होते हैं।

कितना भी कर लो दुनिया में चर्चा,
अस्ल सुकून है बस अल्लाह के दर पर।

क़ुरआन की आयात में है रौशनी,
अल्लाह की रहमत है हर लम्हा जली।

अल्लाह के ज़िक्र से ज़िंदगी निखरती है,
जो रब को भूले, वही बिखरती है।

तौबा का दरवाज़ा अब भी खुला है,
पलट आओ, रब इंतज़ार में खड़ा है।

नहीं माँगना आता तो सिर्फ़ हाथ फैला दो,
वो बंद लबों की बोलियाँ भी सुनता है।

उम्मीद सिर्फ़ अल्लाह से लगाओ,
ये इंसान कुछ नहीं दे सकते।

अपनी परेशानियों को नमाज़ों में बदल दो,
अल्लाह मसाइल को नेमत में बदल देगा।

दुआ में क़ुव्वत, इबादत में रौशनी है,
ईमान में कामयाबी और ख़ुशी है।

नबी की सुन्नत पर अमल करो हर पल,
अल्लाह के रसूल की मुहब्बत से दिल को भर लो।

Allama Iqbal Islamic Shayari In Hindi

Allama Iqbal Islamic Shayari In Hindi

ख़ुदा अगर दिल फ़ितरत-शनास दे तुझ को
सुकूत-ए-लाला-ओ-गुल से कलाम पैदा कर

दिल मुर्दा दिल नहीं है, इसे ज़िंदा कर दोबारा
कि यही है उम्मतों के मर्ज़-ए-कुहन का चारा

हिकमत-ओ-फ़लसफ़ा-ओ-अज़मत-ए-इंसान
महज़ कज़्ब है, हक़ीक़त से ख़ाली

ये दस्तूर-ए-ज़माना है, मुहब्बत इक ख़्वाब
जो सोचता है वही बे-जवाब है

जो दिल की रह को देखा, उसे मैंने पाया
ख़िज़ाँ के रंग को बहार में बदला है

दिल मुर्दा दिल नहीं है, इसे ज़िंदा कर दोबारा
कि यही है उम्मतों के मर्ज़-ए-कुहन का चारा

अपनी मिल्लत पे क़ियास अक़्वाम-ए-मग़रिब से न कर
ख़ास है तरकीब में क़ौम-ए-रसूल-ए-हाशमी

मुहब्बत मुझे उन जवानों से है
सितारों पे जो डालते हैं कमंद

अगर चाहे तो बे-रंग को भी रंग दे
ख़ुदा बंदे की नियतों का जवाब देता है

जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही
खुलते हैं ग़ुलामों पर अस्रार-ए-शहनशाही

दुनिया को है फिर मारका-ए-रूह-ओ-बदन पेश
तहज़ीब ने फिर अपने दरिंदों को उभारा

हर लम्हा है मोमिन की नई शान, नई आन
गुफ़्तार में, किरदार में, अल्लाह की बुरहान

दिलों को फ़तह करने का हुनर आता है मुझ को
मैं अंधेरों में भी रोशन चिराग़ जलाता हूँ

तेरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मेरी सादगी देख, क्या चाहता हूँ

उक़ाबी रूह जब बेदार होती है जवानों में
नज़र आती है उनको अपनी मंज़िल आसमानों में

Muslim Shayari Hindi

Muslim Shayari Hindi

हर सवाल का जवाब क़ुरआन में है
ज़िंदगी का हर हिसाब क़ुरआन में है
ऐ मुसलमान क़ुरआन खोल कर तो देखो
तुम्हारी हर दर्द की दुआ क़ुरआन में है

एक मुसाफ़िर था कुछ देर ठहरा यहाँ
अपनी मंज़िल को आख़िर रवाना हुआ
बात कल की थी महसूस होता है यूँ
जैसे बिछड़े हुए एक ज़माना हुआ

किसी की तरफ़ कोई किनारा न होगा
ग़ैरों का क्या अपनों का सहारा भी न होगा
कर लो मुहब्बत प्यारे नबी ﷺ से
क्योंकि उनके सिवा कोई हमारा न होगा
गिफ़्ट बास्किट्स

तस्कीन-ए-दिल-ओ-जाँ का सामान मुबारक हो
इस माह में आया है क़ुरआन मुबारक हो،
जन्नत के खुले हैं दर, और क़ैद में शैतान है
हर एक मुसलमान को रमज़ान मुबारक हो،

क्या होगा आप ﷺ के दीदार की लज़्ज़त का आलम
हम दीवानों ने सिर्फ़ आप ﷺ का नाम सुन रखा है

ख़ैमा-ए-अफ़लाक़ का उस्तादा उसी नाम से है
नब्ज़-ए-हस्ती तपिश आमादा उसी नाम से है

जदो दिन हशर दे सवाल होन गे
हामी साडे आमना दे लाल होन गे

दिल उनके ज़िक्र से भरता नहीं
मेरे नबी करीम के नाम में ऐसी मिठास है।

मुझ में उनकी सना का सलीक़ा कहाँ
वो शाह-ए-दो-जहाँ, वो कहाँ, मैं कहाँ।

हुस्न-ए-यूसुफ़ देख कर वहाँ कटी थीं उंगलियाँ
ख़ुद चाँद कट गया यहाँ उंगली को देख कर

आप ﷺ की तलब ने हर तलब से बे-तलब रखा है
आप के ﷺ ख़याल ने हर ख़याल से बे-ख़याल रखा है

Islamic Status In Hindi

Islamic Status

हम पर रब की इनायतें बेहिसाब हैं,
अगर कर्मों के मुताबिक़ मिलता, तो शायद कुछ भी न मिलता।

ईश्वर को एक तो मानते हैं हम,
मगर उसके आदेशों को एक भी नहीं मानते।

क़िस्मत जैसी भी हो जीवन में,
सहारा सिर्फ़ नमाज़ और दुआ को बनाओ।

अगर मुहम्मद ﷺ से निष्ठा निभाई है तूने,
तो समझ ले कि हम तेरे हैं,
यह दुनिया क्या चीज़ है—तख़दीर भी तेरी है।

क़यामत के दिन कोई अवसर नहीं मिलेगा,
ऐ जीने वालों, आज ही नमाज़ पढ़ लो—
आज इसकी क़ीमत बहुत कम है।

रोज़ी की चिंता में लोग रब को भूल बैठे,
कमाई की तलाश है,
पर देने वाले को याद नहीं किया।

न पछतावा है, न शर्म का एहसास,
गुनाहों में घिरी यह कैसी ज़िंदगी है।

वह ज़मीन भी आसमान को रश्क में डाल देती है,
जहाँ कुछ पल भी ईश्वर का ज़िक्र होता है।

तौबा की आस में बहुत गुनाह कर चुके हैं ऐ मालिक,
मौक़ा तो दे रहा है तू—
हमें सही राह पर चलने की शक्ति भी दे।

गुनाह का ख़याल ही मिट जाए मन से,
अगर यह यक़ीन बैठ जाए
कि ईश्वर हर पल देख रहा है।

जिसने ख़ुशी में रब का शुक्र अदा किया,
उसे दुख में वही रब सबसे पास मिला।

हमारे हर काम में आसानी आ जाएगी,
जिस दिन की शुरुआत नमाज़ से होगी।

Muslim Shayari Love

Muslim Shayari Love

हम रोज़ गुनाह करते हैं, वो छुपाता है अपनी रहमत से
हम मजबूर अपनी आदत से, वो मशहूर अपनी रहमत से

क़यामत तक सजदे में रहे सर मेरा ऐ ख़ुदा
कि तेरी नेमतों के लिए ये ज़िंदगी काफ़ी नहीं

ख़ुदा की रहमत में कुछ न फ़र्क़ देखा
सारे ज़माने को मैंने परख देखा

बंदा-ए-परवर हिजाब लाज़िम है
हर नज़र पारसा नहीं होती

नुत्क़-ए-रसूल-ए-हक़ का इज़हार है हुसैन
सब्र-ओ-सबात की आहनी दीवार है हुसैन

ज़माने का सहारा तो बज़ाहिर इक दिखावा है
हक़ीक़त में मुझे मेरा ख़ुदा गिरने नहीं देता

तौहीद तो ये है कि ख़ुदा हशर में कह दे
ये बंदा ज़माने से ख़फ़ा मेरे लिए है

मस्जिद तो बना दी शब भर में ईमान की हरारत वालों ने
मन अपना पुराना पापी है, बरसों में नमाज़ी बन न सका

क़ुव्वत-ए-इश्क़ से हर पस्त को बाला कर दे
दहर में इस्म-ए-मुहम्मद ﷺ से उजाला कर दे

सर सजदे में, दिल में दग़ाबाज़ी हो
ऐसे सजदे से भला कैसे ख़ुदा राज़ी हो

कर ले तौबा, अभी भी वक़्त है
फिर न कहना कि हिसाब सख़्त है

क्या जन्नत में जाएँगे हम
हर नमाज़ के बाद नामहरम को माँगने वाले

सजदों से तेरे क्या हुआ सदियाँ गुज़र गईं
दुनिया तेरी बदल दे वो सजदा तलाश कर

Islamic Shayari Love

और जो चीज़ें तहज्जुद में भी माँगने से न मिलें
तो समझ जाओ वो तुम्हारे लिए बेहतर नहीं।

जिन्हें यक़ीन हो मुक़द्दर लिखने वाले पे
वो अंजाम से घबराया नहीं करते

और ख़ुदा अपने बंदे को बिखरने से
पहले ही सँभाल लेता है

दिल के इत्मिनान के लिए इतना ही काफ़ी है कि
जो भी होता है अल्लाह की रज़ा से होता है

कभी-कभी ख़ुदा वो चीज़ भी नवाज़ता है…
जिस को पाने का गुमान तक नहीं किया होता

अरे साहब, जानते हो दुआ क्या है ???
अपना सब कुछ अल्लाह के हवाले कर के बे-फ़िक्र हो जाना

सब्र करना इतना आसान होता तो…!!
अल्लाह ने सब्र पर इतना अज्र न रखा होता

मुहब्बत को बुरा न कहो जनाब !!!
ये तो रब से मिलवा देती है

रब वाक़िफ़ है तुम्हारे दिल की तड़प से
वो ज़ाएअ न करेगा दुआएँ, ज़रा इंतज़ार कर

कोई भी बद-नसीब नहीं होता
बस हर एक का नसीब मुख़्तलिफ़ होता है

मुझे उसके सामने बोलना बहुत ज़्यादा पसंद है
क्यों कि मेरा रब मुझे बड़े ग़ौर से सुनता है

वो बस आज़माता है कि मेरा बंदा मेरी मुहब्बत
के लिए सब्र की किस हद तक जा सकता है

जब ख़ुदा की मसलहतें समझ आ जाएँ
ना साहब !! तो दिल ज़िद छोड़ देता है

अल्लाह ने जितना सुकून नमाज़ में रखा है
इतना सुकून और किसी चीज़ में नहीं रखा

बेहतरीन है वो रास्ता जिसकी मंज़िल
अल्लाह तआला की तरफ़ ले जाए

Best Islamic Shayari 2 Line

बे-ज़बानों को जब वह ज़बान देता है
पढ़ने को फिर वह क़ुरआन देता है

बख़्शने पे आए जब उम्मत के गुनाहों को
तोहफ़े में गुनाहगारों को रमज़ान देता है

झुकते हैं दानिश जहाँ ज़माने के बादशाह
कभी तो देख लूँ मैं वो दरबार-ए-मुस्तफ़ा ﷺ

ख़ुदा से माँग जो कुछ माँगना है अकबर
यही वो दरबार है कि ज़िल्लत नहीं सवाल के बाद

इस ख़ाक़ को हिदायत दे मौला
इस ख़ाक़ में मिलने से पहले

आँख अश्क-बार सही, दिल ये गुनहगार सही
बंदा तो तेरा हूँ, बंदा ये ख़ता-कार सही

मुमकिन नहीं मुझ से ये तर्ज़-ए-मुनाफ़िक़त
दुनिया तेरे मिज़ाज का बंदा नहीं हूँ मैं

लज़्ज़त-ए-गुनाह की ख़ातिर जिसने हार दी थी जन्नत
मेरी रगों में भी उसी आदम का ख़ून है

सौदा-गरी नहीं ये इबादत ख़ुदा की है
ऐ बे-ख़बर जज़ा की तमन्ना भी छोड़ दे

देने वाले की मशीयत पे है सब कुछ मौक़ूफ़
माँगने वाले की हाजत नहीं देखी जाती

तुम सलामत रहो हज़ार बरस
हर बरस के हों दिन पचास हज़ार

हाय बे-बस मगर फिर भी सिद्र न पाए हम
फिर वही दुआ, वही इश्क़, वही तुम और सिर्फ़ तुम

दूर बैठा कोई तो दुआ देता है
मैं जो डूबता हूँ समंदर उछाल देता है

गर तुझ को है यक़ीन इजाबत-ए-दुआ न माँग
यानी बग़ैर यक-दिल बे-मुद्दआ न माँग

है दुआ याद मगर हर्फ़-ए-दुआ याद नहीं
मेरे नग़्मात को अंदाज़-ए-नवा याद नहीं

इलाही! तुझ से दुआ है कि…
किसी के दुख की वजह मेरी ज़ात न हो

Muslim Girl Shayari

नमाज़ से न कहो मुझे काम करना है
बल्कि काम से कहो मुझे नमाज़ पढ़नी है

क़ुरआन की तिलावत किया करो, बेशक़ क़ुरआन
अपने पढ़ने वालों की सिफ़ारिश करेगा

नहीं माँगना आता तो सिर्फ़ हाथ फैला दो
वो बंद लबों की बोलियाँ भी सुनता है

सिर्फ़ एहसास-ए-नदामत, एक सजदा और चश्म-ए-तर
ऐ ख़ुदा, कितना आसान है मनाना तुझ को

निशान-ए-सजदा सजा कर बहुत ग़ुरूर न कर
वो तो नीयतों से नतीजे निकाल लेता है

तोड़ने वाले हज़ार बैठे हैं मगर
जोड़ने वाली ज़ात बस अल्लाह अज़्ज़ो-जल की है

बच्चियों को दीनी तालीम लाज़मी दें क्योंकि अगर
एक माँ दींदार होगी तो दीन नस्लों तक पहुँच जाएगा

गुनाह पर नदामत गुनाह को मिटा देती है
नेकी पर ग़ुरूर नेकी को तबाह कर देता है

कुछ रास्तों की हक़ीक़त अल्लाह हमें इस लिए…
दिखाता है ताकि हम नुक़सान से पहले वापस मुड़ सकें

अल्लाह दिखाता है हर रिश्ते की औक़ात…!!
फिर कहता है कि बता कौन है तेरा मेरे सिवा

रब को ऊपर न ढूँढ, ज़रा-सी गर्दन झुका…
रब तुझे अपने दिल में मिलेगा

लहजा धीमा रखिए साहब… !!!!
मुझे ऊँची आवाज़ में बस अज़ान पसंद है

जो आँसू अल्लाह की आग़ोश में बहाए जाते हैं
उन आँसुओं का भरम वह कभी नहीं तोड़ता

जब मनचाही मुहब्बत खोने लगती है
तब आँख तहज्जुद में रोने लगती है

ये और बात है कि सुनी तेरी गई
वरना ख़ुदा मेरा भी वही था

Hindi Muslim Ekta Shayari

मस्जिद हो या मंदिर, फ़र्क़ सिर्फ़ पहचान का है,
इंसानियत का मज़हब ही सबसे बड़ा ईमान का है।

राम और रहीम जब एक साथ चल देते हैं,
तब नफ़रत के साए ख़ुद-ब-ख़ुद ढल देते हैं।

ना हिंदू बड़ा, ना मुस्लिम बड़ा,
बड़ा वो है जो इंसानियत से जुड़ा।

गंगा और ज़मज़म का पानी अलग सही,
मगर प्यास तो दोनों की एक-सी रही।

भेदभाव के शीशे को जो तोड़ देता है,
वही सच में देश को जोड़ देता है।

नमाज़ और आरती दोनों का पैग़ाम एक,
दिल साफ़ हो तो हर रास्ता नेक।

हाथ जब उठते हैं दुआ और प्रार्थना में,
फ़र्क़ मिट जाता है हर एक भाषा में।

जो धर्म के नाम पर नफ़रत फैलाए,
समझ लो उसने ख़ुदा को ही भुलाए।

एक ही मिट्टी से बने हैं हम सब,
फिर क्यूँ बाँट दे हमें ये मज़हब?

हिंदू मुस्लिम एकता ही पहचान बने,
तभी हर घर में अमन का ईमान बने।

जब दिल से दिल का रिश्ता जुड़ जाता है,
तब हर मज़हब सिर्फ़ मोहब्बत कह जाता है।

आओ मिलकर ये पैग़ाम आम करें,
हम सब पहले इंसान हैं, ये ऐलान करें।

हिंदी में इस्लामी शायरी

गुनाह पर नदामत गुनाह को मिटा देती है
नेकी पर ग़ुरूर नेकी को तबाह कर देता है

कुछ रास्तों की हक़ीक़त अल्लाह हमें इस लिए…
दिखाता है ताकि हम नुक़सान से पहले वापस मुड़ सकें

अल्लाह दिखाता है हर रिश्ते की औक़ात…!!
फिर कहता है कि बता कौन है तेरा मेरे सिवा

रब को ऊपर न ढूँढ, ज़रा-सी गर्दन झुका…
रब तुझे अपने दिल में मिलेगा

सिर्फ़ एहसास-ए-नदामत, एक सजदा और चश्म-ए-तर
ऐ ख़ुदा, कितना आसान है मनाना तुझ को

निशान-ए-सजदा सजा कर बहुत ग़ुरूर न कर
वो तो नीयतों से नतीजे निकाल लेता है

तोड़ने वाले हज़ार बैठे हैं मगर
जोड़ने वाली ज़ात बस अल्लाह अज़्ज़ो-जल की है

बच्चियों को दीनी तालीम लाज़मी दें क्योंकि अगर
एक माँ दींदार होगी तो दीन नस्लों तक पहुँच जाएगा

अल्लाह को दो क़तरे बहुत पसंद हैं, एक शहीद के ख़ून का
दूसरा वो आँसू का क़तरा जो अल्लाह के ख़ौफ़ से बहे

आसमान वाले से अगर राब्ते मज़बूत हों तो
ज़मीन वाले आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते

जो मिल रहा है वही तुम्हारे लिए बेहतर है
तुम नहीं जानते लेकिन देने वाला ख़ूब जानता है

वक़्त बनाने वाले के साथ
वक़्त गुज़ारो, वक़्त कभी बरबाद नहीं होगा

अल्लाह को राज़ी करो
वह तुझे ख़ुश कर देगा

Beautiful Islamic Shayari

दिल सुकून पाता है ज़िक्र-ए-इलाही में,
दुनिया की हर ख़ुशी है उसकी रज़ा में।

सजदे में जो मज़ा है वो कहीं नहीं,
अल्लाह से मिलने का ज़रिया यही है।

हर मुश्किल का हल है दुआ के अंदर,
रब की रहमत है हर बला के अंदर।

अल्लाह की मुहब्बत सबसे बड़ी है,
दुनिया की हर मुहब्बत फ़ानी है।

दिल को सुकून मिलता है ज़िक्र-ए-ख़ुदा में
ख़ुशियाँ मिलती हैं दुआओं की सदा में

दुनिया फ़ानी है, आख़िरत बाक़ी है
यही सबक़ है क़ुरआन में बाक़ी है

ये दुनिया फ़ानी है, दिल न लगाना,
अस्ल ज़िंदगी आख़िरत की है जाना।

रौशनी वही है जो क़ुरआन में है,
सुकून वही है जो अज़ान में है।

ज़िंदगी का सुकून बस इसी में है,
अल्लाह की रज़ा जिस दिल में है।

हर क़दम पर अल्लाह को याद रखा करो,
हर ख़ुशी पर सजदा-ए-शुक्र अदा किया करो।

रब से माँग कर देखो तो सही
एक वही तो है जो हक़ीक़त में आपका मुन्तज़िर है

जो सब्र करे, वही कामयाब है,
अल्लाह के वादे पर ईमान लाज़िमी है।

दुनिया के सुकून में धोका न खाओ,
अस्ल चैन तो बस जन्नत में जाओ।

बंदगी का मज़ा तभी आएगा,
जब हर काम अल्लाह की रज़ा में होगा।

नमाज़ को छोड़ कर ख़ुशी नहीं मिलती,
अल्लाह से रिश्ता जोड़ो, कमी नहीं मिलती।

गुनहगार शख़्स की आज़िज़ी
इबादत-गुज़ार शख़्स के ग़ुरूर से कहीं बेहतर है

Conclusion

In conclusion, Islamic Shayari In Hindi is more than poetry—it is a source of peace, faith, and emotional healing that brings hearts closer to Allah. Through its best lines and deep meanings, Islamic Shayari In Hindi spreads love, patience, and spiritual comfort, leaving a gentle smile on the reader’s face. For anyone seeking hope, positivity, and soulful words, Islamic Shayari In Hindi remains a timeless and powerful expression of faith. 🌙✨

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